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गरीबी से संघर्षरत कवि भगवान कोचले की अनसुनी दास्तां: गाँव से मुंबई तक का सफर

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर तहसील के ग्राम विटामली के निवासी भगवान कोचले (उम्र 46 वर्ष) ने अपनी कला और साहित्य के माध्यम से अपने परिवार की गरीबी को दूर करने का संकल्प लिया है। भगवान कोचले, जो पढ़ाई में छठवीं कक्षा तक ही पहुंचे, अपने गाँव और तहसील का नाम रोशन करने का सपना देख रहे हैं। उनका कहना है कि वे अब तक 20 से अधिक कविताएँ लिख चुके हैं और मुंबई में भी काम कर चुके हैं।

भगवान कोचले के पिता, देवचन्द कोचले का निधन हो चुका है, और उनकी माता, कलाबाई, की देखभाल का जिम्मा भी उनके कंधों पर है। वे खेती और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनकी पत्नी संतोष बाई कोचले हैं और उनके चार बच्चे हैं, जिनमें से एक लड़का और एक लड़की की शादी हो चुकी है। बाकी दो बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है।

भगवान कोचले ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वे अपनी कविताओं और पेंटिंग्स के माध्यम से एक नई पहचान बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी कविताओं को सही मूल्य मिले, जिससे वे अपने परिवार को गरीबी से उबार सकें और समाज में एक विशेष स्थान बना सकें।

भगवान कोचले का शौक कविता, पेंटिंग और देश सेवा से जुड़ा हुआ है। वे अपनी कविताओं में समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं, और उनके शब्दों में किसान की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों की गहरी छाप दिखाई देती है। उनकी एक कविता की कुछ पंक्तियाँ हैं:

“किश्मत देखो किसान की,
> मर्जी है इन्द्र भगवान की,
> हुकूमत चलेगी बइमान की,
> झूठे नारे क्यों लगाते जय जवान जय किसान की,
> किश्मत देखो किसान की,
> राजमहल में बैठे क्या जाने संसार की।”

भगवान कोचले ने अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए समाज से सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि अगर उनकी कविताओं और पेंटिंग्स को उचित प्रोत्साहन और समर्थन मिले, तो वे अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और अपने गाँव, राज्य और तहसील का नाम रोशन कर सकते हैं।

भगवान कोचले का कहना है कि उनके छोटे भाई, मानसिंह कोचले, भी उनका साथ दे रहे हैं, और वे दोनों मिलकर अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य देने की कोशिश कर रहे हैं।

भगवान कोचले की कविताओं में जीवन की सच्चाई और संघर्ष की कहानी झलकती है, और वे अपने शब्दों के माध्यम से समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं। उनकी यह कहानी हम सभी के लिए एक प्रेरणा है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अगर हमारे पास संकल्प और साहस हो, तो हम अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

साहित्यकार भगवान कोचले: संघर्षों के बीच नई पहचान की तलाश

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम विटामली के 46 वर्षीय साहित्यकार भगवान कोचले ने अब तक 20 से अधिक कविताएँ लिखी हैं, जिनमें समाज की समस्याओं और किसानों की दुर्दशा को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया गया है। गरीबी से जूझते हुए, भगवान कोचले अपने परिवार का जीवन-यापन बड़ी मुश्किल से कर रहे हैं। वे अपनी कविताओं और पेंटिंग्स के माध्यम से एक नई पहचान बनाना चाहते हैं। भगवान कोचले का सपना है कि उनकी कविताओं को सही मंच मिले, जिससे वे अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन कर सकें और साहित्यिक जगत में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना सकें।

ई खबर मीडिया के लिए  ब्यूरो देव शर्मा की रिपोर्ट

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